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कà¥à¤·à¥à¤ रोग (लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€) कà¥à¤¯à¤¾ है?
हैनसेन रोग के रूप में à¤à¥€ जाना जाता है, लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ à¤à¤• पà¥à¤°à¤•ार का तà¥à¤µà¤šà¤¾ संकà¥à¤°à¤®à¤£ है जो माइकोबैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤® लेपà¥à¤°à¤¾à¤ˆ नामक बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के कारण होता है, जो लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ नामक à¤à¤• पà¥à¤°à¤—तिशील, जीरà¥à¤£ जीवाणॠसंकà¥à¤°à¤®à¤£ का कारण बनता है। नाक के असà¥à¤¤à¤°, ऊपरी शà¥à¤µà¤¸à¤¨ पथ और छोरों की नसें इससे पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होती हैं।
लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ा कà¥à¤·à¤¤à¤¿, मांसपेशियों की कमजोरी और तà¥à¤µà¤šà¤¾ के घाव पैदा करता है। यदि इलाज नहीं किया जाता है, तो इसका परिणाम महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ विकलांगता और गंà¤à¥€à¤° रूप से विकृत हो सकता है। बहà¥à¤¤ से देशों में लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ काफी आम है, विशेष रूप से सबटà¥à¤°à¥‰à¤ªà¤¿à¤•ल या टà¥à¤°à¥‰à¤ªà¤¿à¤•ल जलवायॠवाले देशों में।
कà¥à¤·à¥à¤ रोग (लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€) कहाठपाया जाता है?
लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ मà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर पाया जाता है, यह विशेष रूप से मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• और रीढ़ की हडà¥à¤¡à¥€ के बाहर की नसों को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करता है। लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ में कà¥à¤› और अंग à¤à¥€ शामिल हैं जिनमें आंखें और नाक के अंदर पतली ऊतक परत शामिल हैं।
कà¥à¤·à¥à¤ रोग (लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€) कैसा दिखता है?
लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ à¤à¤• à¤à¤¸à¥€ बीमारी है जो à¤à¤• अलà¥à¤¸à¤° की तरह दिखती है और तà¥à¤µà¤šà¤¾ पीली और फीकी पड़ जाती है। तà¥à¤µà¤šà¤¾ का पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° à¤à¥€ संवेदना खो देता है।
लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ कितना आम है?
डबà¥à¤²à¥à¤¯à¥‚à¤à¤šà¤“ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ की वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤•ता दर 0.2/10,000 है। विशà¥à¤µ सà¥à¤¤à¤° पर 159 देश लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ से पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हैं।
कà¥à¤¯à¤¾ लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ के विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ रूप (वरà¥à¤—ीकरण) हैं?
टà¥à¤¯à¥‚बरकà¥à¤²à¥‰à¤‡à¤¡ लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€: इस पà¥à¤°à¤•ार के लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ से सीमांकित किनारों के साथ असममित à¤à¤•ानà¥à¤¤ तà¥à¤µà¤šà¤¾ के घाव होते हैं। पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤‚à¤à¤¿à¤• और चिहà¥à¤¨à¤¿à¤¤ तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ा कà¥à¤·à¤¤à¤¿ की à¤à¥€ संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ है। टà¥à¤¯à¥à¤¬à¤°à¤•à¥à¤¯à¥à¤²à¥‰à¤‡à¤¡ लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ अपने आप ठीक हो जाता है।
लेपà¥à¤°à¥‹à¤®à¥‡à¤Ÿà¤¸ लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€: लेपà¥à¤°à¥‹à¤®à¥‡à¤Ÿà¤¸ लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ टà¥à¤¯à¥‚बरकà¥à¤²à¥‰à¤‡à¤¡ लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ से अधिक गंà¤à¥€à¤° है। यह मांसपेशियों की कमजोरी, तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर चकतà¥à¤¤à¥‡ और बमà¥à¤ªà¥à¤¸ का कारण बनता है। यह टà¥à¤¯à¥‚बरकà¥à¤²à¥‰à¤‡à¤¡ लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ से अधिक संकà¥à¤°à¤¾à¤®à¤• माना जाता है और यह किडनी, नाक और अधिक पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨ अंगों को à¤à¥€ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कर सकता है।
बॉरà¥à¤¡à¤°à¤²à¤¾à¤‡à¤¨ लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€: यह à¤à¤• तà¥à¤µà¤šà¤¾ संबंधी तà¥à¤µà¤šà¤¾ की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ है जिसमें लाल, अनियमित आकार के कई तà¥à¤µà¤šà¤¾ के घाव होते हैं।
डबà¥à¤²à¥à¤¯à¥‚à¤à¤šà¤“ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ में विà¤à¤¾à¤œà¤¿à¤¤ है:
पॉसिबैसिलरी: इसमें बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ की उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ के बिना कम घाव होते हैं।
मलà¥à¤Ÿà¥€à¤¬à¥ˆà¤¸à¤¿à¤²à¤°à¥€: इसमें बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ की उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ के साथ अधिक तà¥à¤µà¤šà¤¾ के घाव शामिल होते हैं।
रिडले-जोपलिंग वरà¥à¤—ीकरण: इसमें लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ की पांच शà¥à¤°à¥‡à¤£à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ शामिल हैं:
टà¥à¤¯à¥‚बरकà¥à¤²à¥‰à¤‡à¤¡ लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€: जो लोग टà¥à¤¯à¥‚बरकà¥à¤²à¥‰à¤‡à¤¡ लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ से पीड़ित होते हैं उनकी तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर सफेद धबà¥à¤¬à¥‡ होते हैं और तà¥à¤µà¤šà¤¾ का रंग पीला हो जाता है। जो कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होता है वह तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ाओं के कà¥à¤·à¤¤à¤¿à¤—à¥à¤°à¤¸à¥à¤¤ होने के कारण हानि की अनà¥à¤à¥‚ति करता है।
बॉरà¥à¤¡à¤°à¤²à¤¾à¤‡à¤¨ टà¥à¤¯à¥‚बरकà¥à¤²à¥‰à¤‡à¤¡ लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€: बॉरà¥à¤¡à¤°à¤²à¤¾à¤‡à¤¨ टà¥à¤¯à¥‚बरकà¥à¤²à¥‰à¤‡à¤¡ लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ और टà¥à¤¯à¥‚बरकà¥à¤²à¥‰à¤‡à¤¡ के लकà¥à¤·à¤£ समान हैं लेकिन संकà¥à¤°à¤®à¤£ जारी रहता है और यह आगे à¤à¥€ बढ़ सकता है।
मिड-बॉरà¥à¤¡à¤°à¤²à¤¾à¤‡à¤¨ लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€: इसमें लकà¥à¤·à¤£ बॉरà¥à¤¡à¤°à¤²à¤¾à¤‡à¤¨ टà¥à¤¯à¥‚बरकà¥à¤²à¥‰à¤‡à¤¡ लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ के समान होते हैं। इसमें तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर लाल रंग की पटà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ाà¤à¤ होती हैं जिनके साथ-साथ यह कोई अनà¥à¤¯ रूप या आकार à¤à¥€ ले सकती हैं।
बॉरà¥à¤¡à¤°à¤²à¤¾à¤‡à¤¨ लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€: इस चरण में तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर कई पà¥à¤°à¤•ार के घाव और निशान होते हैं और इसे तà¥à¤µà¤šà¤¾ संबंधी तà¥à¤µà¤šà¤¾ की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ के रूप में à¤à¥€ जाना जाता है।
लेपà¥à¤°à¥‹à¤®à¥‡à¤Ÿà¤¸ लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€: यह लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ के सबसे गंà¤à¥€à¤° पà¥à¤°à¤•ारों में से à¤à¤• है और यह कई पà¥à¤°à¤•ार के घाव बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के कारण होता है। जो कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होता है वह बमà¥à¤ªà¥à¤¸ से à¤à¤°à¤¾ होता है, वह हिसà¥à¤¸à¤¾ सà¥à¤¨à¥à¤¨ और चकतà¥à¤¤à¥‡ à¤à¥€ हो जाता है।
ये à¤à¤‚टीबायोटिकà¥à¤¸ हैं:
डेपसोन
रिफमà¥à¤ªà¤¿à¤‚
माइनोसाइकà¥à¤²à¤¿à¤¨
ओफ़à¥à¤²à¥‰à¤•à¥à¤¸à¤¾à¤¸à¤¿à¤¨
कà¥à¤²à¥‹à¤«à¥ˆà¤œà¥€à¤®à¤¾à¤‡à¤¨
कà¥à¤·à¥à¤ रोग (लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€) के लकà¥à¤·à¤£ कà¥à¤¯à¤¾ हैं?
20 साल तक लकà¥à¤·à¤£ दिखाई नहीं दे सकते हैं। रोग के लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ और टेलà¥à¤Ÿà¥‡à¤² संकेतों की खोज के लिठडॉकà¥à¤Ÿà¤° à¤à¤• शारीरिक परीकà¥à¤·à¤£ कर सकते हैं। लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ के लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ में निमà¥à¤¨à¤²à¤¿à¤–ित शामिल हैं:
तà¥à¤µà¤šà¤¾ कà¥à¤·à¤¤à¤¿
मांसपेशियों की कमजोरी
हाथ, पैर, हाथ और पैर का सà¥à¤¨à¥à¤¨ होना।
इस रोग के दौरान मà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से तà¥à¤µà¤šà¤¾ और नसों पर हमला होता है और तà¥à¤µà¤šà¤¾ विकृत हो जाती है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर कई गांठ, घाव और बमà¥à¤ªà¥à¤¸ होते हैं।
लेकिन अगर वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ पैदा करने वाले बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ से संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ हो जाता है, तो लकà¥à¤·à¤£ 3-4 साल बाद दिखाई देते है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह à¤à¤• पà¥à¤°à¤—तिशील बीमारी है और बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ की ऊषà¥à¤®à¤¾à¤¯à¤¨ अवधि à¤à¥€ बहà¥à¤¤ लंबी होती है
हालांकि तà¥à¤µà¤šà¤¾ मà¥à¤–à¥à¤¯ अंग है जो कà¥à¤·à¤¤à¤¿à¤—à¥à¤°à¤¸à¥à¤¤ है लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ शरीर के तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ा तंतà¥à¤° को à¤à¥€ नà¥à¤•सान पहà¥à¤‚चाता है जिसमें संवेदी तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ाà¤à¤‚, आंखों की नसें, मोटर तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ाà¤à¤‚ और सà¥à¤µà¤¾à¤¯à¤¤à¥à¤¤ तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ाà¤à¤‚ शामिल हैं।
लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ का कà¥à¤¯à¤¾ कारण है?
लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ का मà¥à¤–à¥à¤¯ कारण माइकोबैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤® लेपà¥à¤°à¤¾à¤ˆ है जो à¤à¤• पà¥à¤°à¤•ार का जीवाणॠहै। यह à¤à¤• तरह का धीमी गति से बढ़ने वाला बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ है और इसकी खोज à¤à¤®. लेपà¥à¤°à¥€ ने की थी।
लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ कैसे फैलता है?<
लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ à¤à¤• वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ से दूसरे वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ में बूंदों से फैल सकता है जो नाक से सà¥à¤°à¤¾à¤µ या यौन कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के माधà¥à¤¯à¤® से हो सकता है। इसके पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ जलà¥à¤¦ ही दिखाई नहीं देते कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह à¤à¤• पà¥à¤°à¤—तिशील बीमारी है और इसे ठीक से पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¬à¤¿à¤‚बित करने में उमà¥à¤° लगती है।
कà¥à¤¯à¤¾ लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ संकà¥à¤°à¤¾à¤®à¤• है?
लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ à¤à¤• à¤à¤¸à¥€ बीमारी है जिसे हलà¥à¤•ा संकà¥à¤°à¤¾à¤®à¤• कहा जाता है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह à¤à¤• हवा से होने वाली बीमारी नहीं है बलà¥à¤•ि यौन गतिविधियों और नाक सà¥à¤°à¤¾à¤µ के माधà¥à¤¯à¤® से संचारी है।
कà¥à¤¯à¤¾ लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ सà¥à¤ªà¤°à¥à¤¶ से फैलता है?
लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ à¤à¤• कà¥à¤°à¥‹à¤¨à¤¿à¤• संकà¥à¤°à¤¾à¤®à¤• बीमारी है जो संकà¥à¤°à¤¾à¤®à¤• है। यह à¤à¤• संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ से गैर-संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ लोगों में शरीर के तरल पदारà¥à¤¥ के संपरà¥à¤• के साथ-साथ चकतà¥à¤¤à¥‡ के माधà¥à¤¯à¤® से पà¥à¤°à¥‡à¤·à¤¿à¤¤ किया जा सकता है। हालांकि, संकà¥à¤°à¤®à¤£ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ करने का जोखिम अपेकà¥à¤·à¤¾à¤•ृत कम है, फिर à¤à¥€, सावधानी बरतने की आवशà¥à¤¯à¤•ता होती है।
लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ वाले वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को आप कà¥à¤¯à¤¾ कहते हैं?
लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ à¤à¤• कà¥à¤°à¥‹à¤¨à¤¿à¤• संकà¥à¤°à¤¾à¤®à¤• बीमारी है जो तà¥à¤µà¤šà¤¾ को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करती है। इस बीमारी से संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के लिठइसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया जाने वाला शबà¥à¤¦ ""कोढ़ी"" है।
शबà¥à¤¦ ही उस अरà¥à¤¥ को वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤ करता है जो असà¥à¤µà¥€à¤•ारà¥à¤¯ या अछूत है। इसे à¤à¤• कलंक माना जाता था और पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को नसà¥à¤²à¥€à¤¯ à¤à¥‡à¤¦à¤à¤¾à¤µ का सामना करना पड़ता था।
लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ कब तक संकà¥à¤°à¤¾à¤®à¤• है?
लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ à¤à¤• संकà¥à¤°à¤¾à¤®à¤• तà¥à¤µà¤šà¤¾ संकà¥à¤°à¤®à¤£ है जो संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के शरीर के तरल पदारà¥à¤¥ और चकतà¥à¤¤à¥‡ के संपरà¥à¤• में आने से फैलता है। चूंकि लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ यानी माइकोबैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤® लेपà¥à¤°à¥€ पैदा करने वाले बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ की ऊषà¥à¤®à¤¾à¤¯à¤¨ अवधि आमतौर पर दो से दस साल के बीच होती है, जिस अवधि के लिठà¤à¤• संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ संकà¥à¤°à¤¾à¤®à¤• रहता है, वह औसतन 5 वरà¥à¤· होता है। हालांकि, कà¥à¤› मामलों में अवधि 20 साल तक बढ़ सकती है।
कà¥à¤¯à¤¾ लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ अà¤à¥€ à¤à¥€ मौजूद है?
लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ का असà¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ हिसà¥à¤¸à¥‹à¤‚ में मामलों की घटना से सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ होता है। संयà¥à¤•à¥à¤¤ राजà¥à¤¯ अमेरिका ने बीमारी का पà¥à¤¨à¤°à¥à¤¤à¥à¤¥à¤¾à¤¨ देखा है। अमेरिका में मामलों की संखà¥à¤¯à¤¾ 150 से 250 पà¥à¤°à¤¤à¤¿ वरà¥à¤· है, जबकि मधà¥à¤¯ और दकà¥à¤·à¤¿à¤£ अमेरिका में यह अधिक सामानà¥à¤¯ होने के कारण पà¥à¤°à¤¤à¤¿ वरà¥à¤· कà¥à¤² 20000 नठमामले सामने आते हैं।
लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ के लिठजोखिम कारक कà¥à¤¯à¤¾ हैं?
लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ के लिठये जोखिम कारक हैं:
लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ का सबसे बड़ा खतरा यह है कि यह à¤à¤• वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ से दूसरे वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ में फैलता है। इसलिठजो लोग लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ से पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ लोगों के साथ या उनके आस-पास रहते हैं उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ सबसे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ खतरा होता है।
लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ से पीड़ित लोग लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ से पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हो सकते हैं।
यदि किसी वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ की पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ कमजोर है तो वह à¤à¥€ लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ से पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हो जाता है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि शरीर में बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ से लड़ने की शकà¥à¤¤à¤¿ नहीं होती है।
यदि कोई वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ à¤à¤šà¤†à¤ˆà¤µà¥€ से पीड़ित है और उसके साथ ही लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ से पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हो जाता है तो सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ और खराब हो जाती है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि वे à¤à¤‚टीवायरल उपचार पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ करना शà¥à¤°à¥‚ कर देते हैं।
लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ का निदान कैसे किया जाता है?
रोग के लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ और टेलà¥à¤Ÿà¥‡à¤² संकेतों की खोज के लिठडॉकà¥à¤Ÿà¤° à¤à¤• शारीरिक परीकà¥à¤·à¤£ कर सकते हैं। वे सà¥à¤•à¥à¤°à¥ˆà¤ªà¤¿à¤‚ग या सà¥à¤•िन बायोपà¥à¤¸à¥€ à¤à¥€ करते हैं।
डॉकà¥à¤Ÿà¤° तà¥à¤µà¤šà¤¾ के à¤à¤• छोटे से हिसà¥à¤¸à¥‡ को हटाकर सैंपल को जांच के लिठलैब में à¤à¥‡à¤œà¤¤à¥‡ हैं। वे लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ के पà¥à¤°à¤•ार का निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤£ करने के लिठतà¥à¤µà¤šà¤¾ का लेपà¥à¤°à¥‹à¤®à¤¿à¤¨ परीकà¥à¤·à¤£ à¤à¥€ कर सकते हैं।
डॉकà¥à¤Ÿà¤° तà¥à¤µà¤šà¤¾ में लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ पैदा करने वाले बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ की à¤à¤• छोटी मातà¥à¤°à¤¾ को इंजेकà¥à¤Ÿ करते हैं, आमतौर पर हाथ के ऊपरी हिसà¥à¤¸à¥‡ में। बॉरà¥à¤¡à¤°à¤²à¤¾à¤‡à¤¨ टà¥à¤¯à¥‚बरकà¥à¤²à¥‰à¤‡à¤¡ या टà¥à¤¯à¥‚बरकà¥à¤²à¥‰à¤‡à¤¡ लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ वाले लोगों को इंजेकà¥à¤¶à¤¨ के सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर जलन होती है।
लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ का इलाज कैसे किया जाता है?
लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ का उपचार à¤à¤‚टीबायोटिक दवाओं पर निरà¥à¤à¤° है और यह उपचार के लिठउपयोग किया जाने वाला à¤à¤•मातà¥à¤° साधन है। यदि कोई वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ से पीड़ित है तो उसे à¤à¤®à¤Ÿà¥€à¤¡à¥€ दिया जाता है जो कि बहà¥-औषधीय उपचार है और दवाओं का उपयोग कà¤à¥€ à¤à¥€ मोनोथेरेपी या à¤à¤•ल के रूप में नहीं किया जाता है।
संकà¥à¤°à¤®à¤£ का इलाज à¤à¤‚टीबायोटिक दवाओं की मदद से किया जाता है और यदि उपचार दीरà¥à¤˜à¤•ालिक है और अवधि छह महीने से à¤à¤• वरà¥à¤· से ज़à¥à¤¯à¤¦à¤¾ है तो दो या अधिक à¤à¤‚टीबायोटिक दवाओं का उपयोग किया जाता है।
लेकिन à¤à¤‚टीबायोटिकà¥à¤¸ केवल कà¥à¤·à¤¤à¤¿à¤—à¥à¤°à¤¸à¥à¤¤ तà¥à¤µà¤šà¤¾ का इलाज कर सकते हैं, कà¥à¤·à¤¤à¤¿à¤—à¥à¤°à¤¸à¥à¤¤ नसों का नहीं। लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ के दौरान होने वाले संकà¥à¤°à¤®à¤£, दरà¥à¤¦ और सूजन के इलाज के लिठà¤à¥€ सूजन-रोधी दवाओं का उपयोग किया जाता है। कà¥à¤› सà¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¥‰à¤¯à¤¡ का à¤à¥€ उपयोग किया जाता है जिसमें पà¥à¤°à¥‡à¤¡à¤¨à¤¿à¤¸à¥‹à¤¨ शामिल है।
इस बीमारी से पीड़ित मरीजों में जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° कमजोर पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ का अनà¥à¤à¤µ होता है, इसलिठपà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ को मजबूत बनाने के लिठथैलिडोमाइड दिया जाता है। यह लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ तà¥à¤µà¤šà¤¾ पिंड के उपचार में मदद करता है।
विशà¥à¤µ सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ संगठन ने सà¤à¥€ पà¥à¤°à¤•ार के लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ के इलाज के लिठबहà¥-औषधि चिकितà¥à¤¸à¤¾ का आविषà¥à¤•ार किया है। यह दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¤° में मà¥à¤«à¥à¤¤ में उपलबà¥à¤§ है। लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ पैदा करने वाले जीवाणà¥à¤“ं को मारने के लिठकाफी कà¥à¤› à¤à¤‚टीबायोटिकà¥à¤¸ à¤à¥€ उपलबà¥à¤§ हैं। आपका डॉकà¥à¤Ÿà¤° à¤à¤• साथ कई à¤à¤‚टीबायोटिकà¥à¤¸ लिख सकता है। à¤à¤‚टीबायोटिकà¥à¤¸ हैं:
डैपसोन
रिफमà¥à¤ªà¤¿à¤‚
माइनोसाइकà¥à¤²à¤¿à¤¨
ओफ़à¥à¤²à¥‰à¤•à¥à¤¸à¤¾à¤¸à¤¿à¤¨
कà¥à¤²à¥‹à¤«à¤¼à¤¾à¤œà¤¼à¤¾à¤®à¤¾à¤‡à¤¨
कà¥à¤¯à¤¾ लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ ठीक हो सकता है?
लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ à¤à¤• जीवाणॠसंकà¥à¤°à¤®à¤£ है जिसे ठीक किया जा सकता है। उपचार दशकों पहले खोजा गया था और तब से इसे संशोधित किया गया है। डैपसोन पहली लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€-रोधी दवा है जिसका उपचार लंबे समय तक चलता रहा। उसके बाद, रिफैमà¥à¤ªà¤¿à¤¸à¤¿à¤¨ और कà¥à¤²à¥‹à¤«à¤¼à¤¾à¤œà¤¼à¤¿à¤®à¤¾à¤‡à¤¨ दवाओं को मलà¥à¤Ÿà¥€à¤¡à¥à¤°à¤— थेरेपी (à¤à¤®à¤¡à¥€à¤Ÿà¥€) के रूप में उपचार में शामिल किया गया।
डबà¥à¤²à¥à¤¯à¥‚à¤à¤šà¤“ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ à¤à¤®à¤¡à¥€à¤Ÿà¥€ की सिफारिश की गई है और अब इसमें डैपसोन, रिफैमà¥à¤ªà¤¿à¤¸à¤¿à¤¨ और कà¥à¤²à¥‹à¤«à¤¼à¤¾à¤œà¤¼à¤¿à¤®à¤¾à¤‡à¤¨ नाम की तीन दवाà¤à¤‚ शामिल हैं।
कà¥à¤¯à¤¾ लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ का कोई टीका है?
लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ की रोकथाम के लिठअब तक टीके खोजे जा चà¥à¤•े हैं। बीसीजी यानी बैसिलस कैलमेट गà¥à¤à¤°à¤¿à¤¨ वैकà¥à¤¸à¥€à¤¨ को बीमारी के खिलाफ à¤à¤• निवारक उपाय के रूप में बढ़ावा दिया गया है। हालांकि, टीबी के मामले में पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤•ारिता की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में टीके की पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤•ारिता कà¥à¤› अलग है, जो उसी टीके को निवारक उपायों के रूप में à¤à¥€ मानता है।
लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ की जटिलताà¤à¤‚ कà¥à¤¯à¤¾ हैं?
लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ से पीड़ित वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को ये जटिलताà¤à¤‚ हो सकती हैं:
विकृत अंग जिनमें चेहरा, हाथ, पैर या कोई अनà¥à¤¯ à¤à¤¾à¤— शामिल हैं
गà¥à¤²à¥‚कोमा या अंधापन
किडनी फेलियर
पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ में बांà¤à¤ªà¤¨ और सà¥à¤¤à¤‚à¤à¤¨ दोष
मांसपेशियों की कमजोरी जो कई कठिनाइयों का कारण बनती है
नाक की सà¥à¤¥à¤¾à¤¯à¥€ कà¥à¤·à¤¤à¤¿ जिसमें नाक से खून बहना, और à¤à¤°à¥€ हà¥à¤ˆ नाक शामिल है
मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• और रीढ़ की हडà¥à¤¡à¥€ के बाहर मौजूद नसों को सà¥à¤¥à¤¾à¤¯à¥€ कà¥à¤·à¤¤à¤¿à¥¤ इसमें हाथ, पैर और पैरों की नसें à¤à¥€ शामिल हैं।
लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ को कैसे रोकें?
इस बीमारी की कोई सटीक रोकथाम नहीं है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह नाक की बूंदों से फैलता है इसलिठलेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ से बचने के लिठआपको उस वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के साथ निकट संपरà¥à¤• से बचना चाहिठजो लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ से पीड़ित है और संकà¥à¤°à¤®à¤£ से गà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤ है।
लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ वाले रोगियों के लिठकौन सा à¤à¥‹à¤œà¤¨ अचà¥à¤›à¤¾ है?
लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ के विकास के कारणों में से à¤à¤• à¤à¥‹à¤œà¤¨ की अपरà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ और अनà¥à¤šà¤¿à¤¤ खपत है, जिससे पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के शरीर में पोषण की कमी हो जाती है। इससे रोग पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤• कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ कमजोर हो जाती है जिससे शरीर में संकà¥à¤°à¤®à¤£ का खतरा बढ़ जाता है। जिन खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ को लेने को पà¥à¤°à¤¾à¤¥à¤®à¤¿à¤•ता दी जानी चाहिठउनमें ताजे फल और सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚, दूध, अंडे, मांस, मछली आदि शामिल हैं।
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